Thursday, March 18, 2021

Corona virus journey in 21 century




covid-19



 कोरोना वायरस का तकनीकी नाम सार्स कोव-2 (SARS CoV-2) है. कोरोना वायरस से होने वाली बिमारी को कोविड-19 कहा जाता है. चूंकि यह वायरस साल 2019 में शुरू हुआ था, इसलिए अंत में 19 जोड़ा गया है. कोरोना वायरस को छोटा करने पर कोविड मिलता है.



​पैन्डेमिक (वैश्विक महामारी) 
विश्व स्वास्थ संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने 10 दिन पहले कोविड-19 को पैन्डेमिक यानी वैश्विक महामारी घोषित किया था. जब कोई बीमारी एक देश या इलाके से निकल पूरी दुनिया पर अपनी पकड़ बना लेती है, तो इसे पैन्डेमिक कहा जाता है. कोरोना से तकरीबन पूरी दुनिया संक्रमित है.

सोशल डिस्टेंसिंग
सोशल डिस्टेंसिंग का अर्थ है कि सामाजिक दूरी. अपने सामान्य जीवन में हम घर-परिवार के इतर भी कई लोगों से मिलते हैं. बाजार, दफ्तर, यात्रा के दौरान कई लोगों से मेल-जोल होता है. इसी से सामाजिक संबंध समृद्ध होते हैं. ऐसे संबंधों से दूरी बनाने का अर्थ है सोशल डिस्टेंसिंग.

यदि हम एक-दूसरे के करीब न जाएं या फिजिकल संपर्क तोड़ दे तो कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकता है. बूढ़ा हो या जवान, यह तरीका हर किसी के लिए कारगर है. इसी वजह से कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की सहूलियत अपने कर्मचारियों को दी है.

​इन्क्यूबेशन
यदि कोई इस वायरस की चपेट में आता है, तो जरूरी नहीं है कि बीमारी के लक्ष्ण तुरंत ही नजर आए. इसका असर दिखने में 2 से 14 दिन तक का समय लग सकता है. इसी समय को इन्क्यूबेशन अवधि कहा जाता है. ध्यान रहे कि लक्षण नजर न आने पर भी संक्रमण फैल सकता है.

​आइसोलेशन
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए कई लोगों को अलग किया जाता है. अलग-थलग रखने के इस प्रयास को आइसोलेशन कहा जाता है. कई लोग खुद को स्वयं ही अलग कर देते हैं. इसे सेल्फ आइसोलेशन कहा जाता है.

इस स्थिति में लोग स्वस्थ होने पर भी दूसरे से मिलना-जुलना कम करते है. ऐसी स्थिति में लोग अमूमन अपने घर में ही रहते हैं. इसके जरिए खुद को वायरस के संपर्क में आने से रोका जाता है.

​क्वारंटाइन

बाहर से आने वाले किसी शख्स या पशु को अलग रखने की प्रक्रिया को क्वारंटाइन कहा जाता है. इसके जरिए यदि वह शख्स वायरस से संक्रमित है भी, तो वायरस को फैलने से रोका जा सकता है.


इस दौरान उसके लक्ष्णों पर नजर रखी जाती है और कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर इलाज किया जाता है. यदि बाहर से आने वाला शख्स किसी ऐसे इलाके से आया है जहां संक्रमण अधिक और वह खुद को अलग कर लेता है, तो इसे सेल्फ क्वारंटाइन कहा जाता है.

कोरोना वायरस के मामले में यह अवधि 14 दिनों की है क्योंकि लक्षण नजर आने में 14 दिनों तक का समय लग जाता है. ऐसे शख्स से दूरी बनाए रखना ही उचित माना जाता है.

लॉकडाउन


कोरोना वायरस के कहर से पहले दुनिया को एक ग्लोबल विलेज यानी वैश्विक गांव माना जाता था. कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने देशों को देशों से और शहरों को शहरों से काट दिया है.
इसे लॉकडाउन कहा जा रहा है. इस स्थिति में न कोई बाहर जा रहा है और न ही कोई अंदर आ रहा है. लॉकडाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है जो महामारी या किसी प्राकृतिक आपदा के वक्त किसी इलाके में सरकारी तौर पर लागू होती है.
लॉकडाउन की स्थ‍िति में उस इलाके के लोगों को घरों से निकलने की अनुमति नहीं होती है. उन्हें सिर्फ दवा या अनाज जैसी जरूरी चीजों के लिए बाहर आने की इजाजत मिलती है.


कोरोनियल्स
यह शब्द विज्ञान नहीं, सोशल मीडिया की देन है. 21वीं सदी में वयस्क होने वाले लोगों को मिलेनियल्स कहा जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो 1990 के दशक में पैदा होने वाले इसके दायर में आते हैं. कोरोनियल्स का अर्थ है कि कोरोना वायरस के आने के नौ महीने बाद पैदा होने वाले बच्चे.
दरअसल, इस दौरान ज्यादातर लोग अपने घरों में हैं. बाहर जाने की न कोई वजह है और न ही कोई आसार. ऐसे में संभव है कि इस साल के अंत या नए साल की शुरुआत में दुनिया में कई अधिक बच्चे पैदा होंगे. इन बच्चों को ही कोरोनियल्स कहा जा रहा है.

कोविड-19 वैक्सीन लगवाने के लिए कैसे रजिस्टर करें?



स्वास्थ्यकर्मियों और फ़्रंटलाइन वर्कर्स के पहले चरण में टीका लगाने की प्रक्रिया अलग थी. तब टीका लगवाने के लिए को-विन (Co-WIN) ऐप पर रजिस्टर नहीं कराना होता था.

अब कोरोना का टीका लगवाने के लिए आपको पहले को-विन ऐप पर रजिस्टर करना होगा. इस ऐप में जीपीएस की सुविधा भी होगी, जिससे लोग अपनी सुविधानुसार तारीख़ और स्थान चुन सकते हैं.

हालाँकि, ये इस पर निर्भर करेगा कि किसी वैक्सीनेशन सेंटर में कितने स्लॉट उपलब्ध हैं. साथ ही लोग ये भी पता कर सकेंगे कि उनका नज़दीकी वैक्सीनेशन सेंटर कौन-सा है, चाहे सरकारी या प्राइवेट.

कोविड-19 वैक्सीन के लिए आम लोगों को भारत सरकार द्वारा जारी को-विन ऐप (CoWIN App) पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. को-विन ऐप पर रजिस्ट्रेशन होने के बाद आपके मोबाइल पर एक मैसेज आएगा जिसमें वैक्सीन लगाने का समय, तारीख़ और केंद्र का पूरा ब्योरा होगा.

रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपना कोई एक फ़ोटो आईडी दर्ज करना होगा जिसमें से आप आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते की पासबुक, MP/MLA/MLC द्वारा जारी किया गया कोई पहचान पत्र या फिर पेंशन कार्ड या एम्पलॉयर द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र या फिर वोटर आईकार्ड भी जमा करवा सकते हैं.

भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में वो सीधे वैक्सीनेशन सेंटर भी जा सकते हैं. उन्हें अपने साथ कोई पहचान प्रमाण पत्र ले जाना होगा, जैसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस आदि. वैक्सीनेशन सेंटर पर मौजूद वॉलिंटियर्स उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने में मदद करेंगे.

आप उस राज्य के वैक्सीनेशन सेंटर पर भी जा सकते हैं, जहाँ आप मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं. जैसे कि अगर आप दिल्ली के निवासी हैं और मातदाता सूची में आपका नाम दर्ज है, लेकिन आप मुंबई रहते हैं, तब भी आप मुंबई में वैक्सीन लगवा सकते हैं.

अगर आप यात्रा कर रहे हैं या अन्य ज़रूरी काम होने की स्थिति में आप वैक्सीन की दोनों डोज़ अलग-अलग सेंटर्स पर भी लगवा सकते हैं. बशर्ते कि उस सेंटर पर आपकी दूसरी डोज़ की तारीख़ पर वैक्सीन की दूसरी डोज़ उपलब्ध हो.

वैक्सीन लगाने के बाद आपको वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा. इसे आप आरोग्य सेतु ऐप से डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लेनी ज़रूरी होगी. साथ ही 14 अंकों का बेनिफिशियरी रेफरेंस आईडी भी दर्ज करना होगा.




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