covid-19
कोरोना वायरस का तकनीकी नाम सार्स कोव-2 (SARS CoV-2) है. कोरोना वायरस से होने वाली बिमारी को कोविड-19 कहा जाता है. चूंकि यह वायरस साल 2019 में शुरू हुआ था, इसलिए अंत में 19 जोड़ा गया है. कोरोना वायरस को छोटा करने पर कोविड मिलता है.
यदि हम एक-दूसरे के करीब न जाएं या फिजिकल संपर्क तोड़ दे तो कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकता है. बूढ़ा हो या जवान, यह तरीका हर किसी के लिए कारगर है. इसी वजह से कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की सहूलियत अपने कर्मचारियों को दी है.
इस स्थिति में लोग स्वस्थ होने पर भी दूसरे से मिलना-जुलना कम करते है. ऐसी स्थिति में लोग अमूमन अपने घर में ही रहते हैं. इसके जरिए खुद को वायरस के संपर्क में आने से रोका जाता है.
इस दौरान उसके लक्ष्णों पर नजर रखी जाती है और कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर इलाज किया जाता है. यदि बाहर से आने वाला शख्स किसी ऐसे इलाके से आया है जहां संक्रमण अधिक और वह खुद को अलग कर लेता है, तो इसे सेल्फ क्वारंटाइन कहा जाता है.
कोरोना वायरस के मामले में यह अवधि 14 दिनों की है क्योंकि लक्षण नजर आने में 14 दिनों तक का समय लग जाता है. ऐसे शख्स से दूरी बनाए रखना ही उचित माना जाता है.
कोरोना वायरस के कहर से पहले दुनिया को एक ग्लोबल विलेज यानी वैश्विक गांव माना जाता था. कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने देशों को देशों से और शहरों को शहरों से काट दिया है.
इसे लॉकडाउन कहा जा रहा है. इस स्थिति में न कोई बाहर जा रहा है और न ही कोई अंदर आ रहा है. लॉकडाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है जो महामारी या किसी प्राकृतिक आपदा के वक्त किसी इलाके में सरकारी तौर पर लागू होती है.
लॉकडाउन की स्थिति में उस इलाके के लोगों को घरों से निकलने की अनुमति नहीं होती है. उन्हें सिर्फ दवा या अनाज जैसी जरूरी चीजों के लिए बाहर आने की इजाजत मिलती है.
दरअसल, इस दौरान ज्यादातर लोग अपने घरों में हैं. बाहर जाने की न कोई वजह है और न ही कोई आसार. ऐसे में संभव है कि इस साल के अंत या नए साल की शुरुआत में दुनिया में कई अधिक बच्चे पैदा होंगे. इन बच्चों को ही कोरोनियल्स कहा जा रहा है.
स्वास्थ्यकर्मियों और फ़्रंटलाइन वर्कर्स के पहले चरण में टीका लगाने की प्रक्रिया अलग थी. तब टीका लगवाने के लिए को-विन (Co-WIN) ऐप पर रजिस्टर नहीं कराना होता था.
अब कोरोना का टीका लगवाने के लिए आपको पहले को-विन ऐप पर रजिस्टर करना होगा. इस ऐप में जीपीएस की सुविधा भी होगी, जिससे लोग अपनी सुविधानुसार तारीख़ और स्थान चुन सकते हैं.
हालाँकि, ये इस पर निर्भर करेगा कि किसी वैक्सीनेशन सेंटर में कितने स्लॉट उपलब्ध हैं. साथ ही लोग ये भी पता कर सकेंगे कि उनका नज़दीकी वैक्सीनेशन सेंटर कौन-सा है, चाहे सरकारी या प्राइवेट.
कोविड-19 वैक्सीन के लिए आम लोगों को भारत सरकार द्वारा जारी को-विन ऐप (CoWIN App) पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. को-विन ऐप पर रजिस्ट्रेशन होने के बाद आपके मोबाइल पर एक मैसेज आएगा जिसमें वैक्सीन लगाने का समय, तारीख़ और केंद्र का पूरा ब्योरा होगा.
रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपना कोई एक फ़ोटो आईडी दर्ज करना होगा जिसमें से आप आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते की पासबुक, MP/MLA/MLC द्वारा जारी किया गया कोई पहचान पत्र या फिर पेंशन कार्ड या एम्पलॉयर द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र या फिर वोटर आईकार्ड भी जमा करवा सकते हैं.
भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में वो सीधे वैक्सीनेशन सेंटर भी जा सकते हैं. उन्हें अपने साथ कोई पहचान प्रमाण पत्र ले जाना होगा, जैसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस आदि. वैक्सीनेशन सेंटर पर मौजूद वॉलिंटियर्स उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने में मदद करेंगे.
आप उस राज्य के वैक्सीनेशन सेंटर पर भी जा सकते हैं, जहाँ आप मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं. जैसे कि अगर आप दिल्ली के निवासी हैं और मातदाता सूची में आपका नाम दर्ज है, लेकिन आप मुंबई रहते हैं, तब भी आप मुंबई में वैक्सीन लगवा सकते हैं.
अगर आप यात्रा कर रहे हैं या अन्य ज़रूरी काम होने की स्थिति में आप वैक्सीन की दोनों डोज़ अलग-अलग सेंटर्स पर भी लगवा सकते हैं. बशर्ते कि उस सेंटर पर आपकी दूसरी डोज़ की तारीख़ पर वैक्सीन की दूसरी डोज़ उपलब्ध हो.
वैक्सीन लगाने के बाद आपको वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा. इसे आप आरोग्य सेतु ऐप से डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लेनी ज़रूरी होगी. साथ ही 14 अंकों का बेनिफिशियरी रेफरेंस आईडी भी दर्ज करना होगा.




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